CAA और NRC Bill क्या है , इसका क्या असर रहेगा । जाने CAA और NRC के बारे में संपूर्ण जानकारी ।

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CAA और NRC Bill क्या है , इसका क्या असर रहेगा । जाने CAA और NRC के बारे में संपूर्ण जानकारी ।

इस पोस्ट में क्या है ?

CAA Bill Kya hai , NRC Bill Kya hai ; CAA Bill In Hindi , NRC Bill in Hindi

भारत सरकार के द्वारा CAA BILL को पास कर दिया गया है और भारत में अभी NRC BILL लागू करने के ऊपर बात की जा रही है । ऐसे में हर भारतीय नागरिकों को यह जानना चाहिए कि CAA BILL क्या है और NRC BILL क्या होता है ?...इन दोनों नियमों का या इन दोनों प्रावधानों का आप पर क्या असर होगा ?

नोट :- यहां पर हम बस आपको दोनों BILL (citizenship amendment act, national register of citizens of India) और आपके मन में जो कुछ भी सवाल हैं , उसकी जानकारी देने वाले हैं हम कोशिश करेंगे बहुत ही आसान शब्दों में आपको इन दोनों Bill के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की ।

CAA AND NRC BILL

 

READ THIS POST IN ENGLISH

12 दिसंबर ,2019 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद नागरिकता विधेयक(CAB) 2019 को अब नागरिकता विधायक कानून (CAA)बना दिया गया है । इस नागरिकता कानून 2019(CAA 2019) को लेकर देश में बहुत ज्यादा विरोध हो रहा है ।

तो चलिए जान लेते हैं नागरिकता विधेयक कानून क्या है(what is CAA in Hindi) और इसका आप पर क्या असर रहेगा ?

नागरिकता विधेयक 2019(CAB) गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 9 दिसंबर ,2019 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसे लोकसभा में 311 बनाम 80 वोटों से पारित कर दिया गया ।

11 दिसंबर को इसे राज्यसभा में पेश किया गया जहां नागरिकता विधेयक 2019(CAB) को 125 और खिलाफ में 99 वोट दिए गए हैं । इस प्रकार से नागरिकता विधेयक बिल(CAB Bill) पास हो गया ।

बिल पास होने के बाद इसे 12 दिसंबर को राष्ट्रपति के द्वारा मंजूरी भी दे दी गई तब जाकर नागरिकता विधेयक बिल (CAB Bill),नागरिकता विधेयक कानून(CAA) बन गया । और नागरिकता विधेयक कानून बनने के बाद देशभर में इसका जमकर और बहुत कड़ा विरोध किया जा रहा है तो चलिए, हम जानते हैं नागरिकता विधेयक 1955(CAB 1995) क्या था और इसमें कब संशोधन किया गया ?

नागरिकता कानून 1955 क्या है ? , What Is Citizenship Amendment Act 1955 ?

नागरिकता कानून 1955 का संबंध भारतीय नागरिकता अधिग्रहण करने और नागरिकता तय करने के लिए है । भारत के संविधान के साथ नागरिकता कानून 1955 में भारत की नागरिकता से संबंधित विस्तृत कानून बनाया गया है ।
किसी व्यक्ति को नागरिकता देने के लिए भारत के संविधान में अनुच्छेद 5 से 11(पार्ट ll ) में इसका प्रावधान विस्तृत रूप में किया गया है ।

नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 क्या था ? what was the citizenship amendment Bill ,2016 ?

नागरिकता कानून जो 1955 में पहली बार बनाया गया था उसे संशोधित करने के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 में पेश की गई थी ।

यह विधेयक 19 जुलाई ,2016 को पेश किया गया था । इसमें भारत की तीन मुस्लिम पड़ोसी देशों बांग्लादेश ,पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए अवैध गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान है ।

12 अगस्त , 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमेटी के पास भेजा गया था । कमेटी ने 7 जनवरी 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंपी उनके बाद अगले दिन यानी 8 जनवरी 2019 को विधेयक लोकसभा में पास किया गया ,लेकिन उस समय राज्यसभा में यह विधेयक पेश नहीं हो पाया था । इस विधेयक को शीतकालीन सत्र में सरकार की ओर से फिर से पेश किया गया है ।

नागरिकता विधेयक 2019 फिर से क्यों पेश करना पड़ा ?

संसदीय प्रक्रिया में एक ऐसा भी नियम बनाया गया है जिसके अनुसार अगर कोई विधेयक लोकसभा में पास हो जाता है लेकिन राज्यसभा में पास नहीं हो पाता है और लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है यानी उसकी वैधता समाप्त हो जाती है ।

यानी उस विधेयक को फिर से दोनों सदनों से पास कराना होगा । वहीं राज्यसभा के लिए नियम थोड़े अलग हैं , अगर कोई विधेयक राज्यसभा से लंबित हो जाता है और लोकसभा से पास नहीं हो पाता और लोकसभा भंग हो जाती है तो वह विधेयक निस्प्रभावी नहीं होता है ।

चुकी यह विधेयक राज्यसभा के पास नहीं जा पाया था और इसी बीच 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया इसलिए इस विधेयक को फिर से दोनों सदन में पास कराना पर और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन गया है जिसे अभी CAA (Citizenship Amendment Act) कहा जा रहा है ।

Citizenship Amendment Act नए कानून में क्या प्रावधान किया गया है ?

नागरिकता संशोधन कानून 2019(CAA 2019) में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू ,सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है ।

पहले किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए उसे कम से कम पिछले 11 वर्षों से भारत में रहना अनिवार्य था इस नियम को आसान बनाते हुए नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 साल से लेकर 6 साल कर दिया गया है ।

यानी इन 3 देशों से आए ऊपर लिखित 6 धर्म हिंदू, सिख ,बौद्ध ,जैन, पारसी और क्रिश्चियन अगर बीते 1 से 6 सालों में भारत में आकर बसे हैं तो इन लोगों को नागरिकता मिल सकेगी ।

आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत की तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बना दिया गया है ।

नोट :- अगर इन तीनों मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों (बांग्लादेश ,अफगानिस्तान और पाकिस्तान ) से आए हैं लोग मुस्लिम हैं तो उनके लिए क्या प्रावधान है इसके ऊपर हम आगे बात करेंगे !

NRC BILL (National Register Of Citizens Of India ) भारतीय राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

NRC Bill :- एनआरसी बिल का सबसे बड़ा मकसद देश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को उनके देश वापस भेजना है ।

National register of citizen bill in Hindi /NRC in Hindi

National register of citizen bill :- एनआरसी(NRC Bill) या नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन बिल का सबसे बड़ा मकसद भारत देश में बसे घुसपैठियों को बाहर निकालना है ।

एनआरसी बिल (NRC Bill) का उद्देश्य भारत देश में जो अवैध रूप से रह रहे हैं उन्हें उनके देश वापस भेजना है ।

एनआरसी बिल(NRC Bill) अभी केवल आसाम में पूरा किया गया है ,लेकिन देश के गृह मंत्री अमित शाह जी के द्वारा यह साफ किया गया है कि एनआरसी(NRC) को पूरे देश में लागू किया जाएगा ।

ध्यान रखिए एनआरसी(NRC) अभी पूरे देश के लिए लागू नहीं है ।

नोट :- एनआरसी बिल (NRC Bill) का भारत में रह रहे किसी धर्म के नागरिकों से लेना देना नहीं है इसका मकसद केवल भारत में रह रहे घुसपैठियों को बाहर निकालना है । (चाहे वह किसी भी धर्म के हो )

एनआरसी का क्या मतलब है /what is nrc Bill in Hindi ?

National register of citizen bill (NRC Bill ) एक रजिस्टर्ड है जिसमें भारत में रह रहे सभी वैद्य नागरिक का रिकॉर्ड रखा जाएगा । बता दे कि एनआरसी की सुविधा 2013 में सुप्रीम कोर्ट की देख रेख में असम में हुई थी फिलहाल यह असम के अलावा किसी अन्य राज्य में लागू नहीं किया गया है ।

NRC में शामिल होने के लिए क्या जरूरी है ?

एनआरसी के तहत भारत का नागरिक साबित करने के लिए किसी व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले भारत आ गए थे ।

एनआरसी को आसाम में अवैध बांग्लादेशियों को निकालने के लिए लागू किया गया है ।

अगले संसद सत्र में इसे पूरे देश में लागू करने का बिल लाया जा सकता है । एनएससी(NRC) को पूरे भारत में लागू करने के लिए एक जटिल और मुश्किल प्रक्रिया से गुजरने होगी ।

CAA Bill और NRC Bill से संबंधित पूछे जाने वाले कुछ प्रश्न और उसके उत्तर ।

क्या है CAA ?

Citizenship Amendment Act के तहत पाकिस्तान ,अफगानिस्तान ,बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर आए हिंदू ,सिख ,इसाई ,पारसी,जैन और बुध धर्म के लोगों को भारत में रहने के लिए भारतीय होने की नागरिकता दी जाएगी ।

CAA को लेकर इतना ज्यादा प्रदर्शन क्यों हो रहा है ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट (CAA) को लेकर देश में 2 तरीके से प्रदर्शन किया जा रहा है ।
पहला नॉर्थ ईस्ट इंडिया में हो रहा है ,जो इस बात को लेकर हो रहा है कि इस एक्ट को लागू करने से वहां बाहर से आकर लोग रहेंगे जिससे उनकी संस्कृति को खतरा है ।
दूसरा प्रदर्शन नॉर्थ ईस्ट को छोर भारत के विशेष हिस्से में हो रहे हैं या प्रदर्शन इस बात को लेकर किया जा रहा है कि यह कानून गैर संवैधानिक है ।

NRC के तहत कौन कौन से डॉक्यूमेंट वैलिड है ?

ध्यान इस बात की दे कि NRC अभी केवल आसाम में लागू हुई है और आसाम के लोगों के लिए ही अभी केवल एनआरसी की सूची तैयार की गई है ।

NRC को अभी पूरे भारत में लागू नहीं किया गया है और अभी इसके प्रावधान भी तय नहीं किए गए हैं । NRC BILL को पूरे भारत में लागू करने के लिए सरकार को अभी काफी लंबा सफर तय करना होगा एक लंबी प्रक्रिया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही NRC को पूरे देश में लागू किया जा सकेगा ।

असम एनआरसी के लिए जब असम समझौता हुआ तो उच्च न्यायालय के आधार पर असम के नागरिकों को 1971 से पहले के वंशावली के लिए किसी प्रकार के पहचान पत्र या माता-पिता पूर्वजों के जन्म प्रमाण पत्र जैसे किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करना जरूरी था ।

।। नागरिकता संशोधन कानून के बारे में जानकारी को सही तथ्यों की मदद से समझें ।।

1. क्या CAA में ही NRC शामिल है ?

ऐसा नहीं है CAA अलग कानून है और NRC एक अलग प्रक्रिया है । CAA संसद से पारित होने के बाद देशभर में लागू हो चुका है लेकिन NRC को अभी देशभर में लागू नहीं किया गया है।

ना हीं NRC के नियम और इसकी प्रक्रिया अभी तय की गई है । असम में जो NRC की प्रक्रिया चल रही है वहां माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और असम समझौते के तहत चलाई जा रही है ।

2. क्या भारतीय मुसलमानों को CAA और NRC को लेकर किसी प्रकार से डरने या घबराने की जरूरत है ?

नहीं किसी भी धर्म को मानने वाले भारतीय नागरिक को ना ही CAA से परेशान होने की जरूरत है और ना ही उन्हें NRC से घबराने की आवश्यकता है ।

3. क्या एनआरसी का असर सिर्फ मुसलमानों पर ही होगा ?

नहीं बिल्कुल नहीं । इसका किसी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है ,यह भारत के सभी नागरिकों के लिए होगा और इसका उद्देश्य भारत में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों को उनके देश वापस भेजना है । NRC एक रजिस्टर्ड है जिसमें ऐसे लोगों की जानकारी शामिल की जाएगी जो भारतीय नागरिक हैं ।

4. क्या NRC में धार्मिक आधार पर लोगों को बाहर रखा गया है ?

ऐसा नहीं है , NRC किसी धर्म के बारे में बिल्कुल नहीं है जब एनआरसी लागू किया जाएगा वह ना तो धर्म के आधार पर लागू किया जाएगा और ना ही उसे धर्म के आधार पर लागू किया जा सकता है । भारत में किसी को इस आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता है कि वह किसी विशेष धर्म को मानने वाला या उस धर्म को पालन करने वाला है ।

5. क्या एनआरसी के जरिए मुस्लिमों से भारतीय होने का सबूत मांगा जाएगा ?

सबसे पहले आपको यह जानना चाहिए कि एनआरसी को अभी राष्ट्रीय स्तर या केंद्रीय स्तर पर शुरू नहीं किया गया है ।

ना ही अभी सरकार के द्वारा कोई आधिकारिक घोषणा की गई है और ना ही इस नियम के ऊपर अभी कोई कानून बनाए गए हैं ।
अगर भविष्य में एनआरसी को लागू भी किया जाता है तो इसे आप ऐसे ना लें कि आप से भारतीय होने का पहचान पत्र माना जा रहा है !

इसे आप एक प्रकार से आधार कार्ड या कोई दूसरा पहचान पत्र बनाने जैसी प्रक्रिया के तौर पर ले सकते हैं ।
NRC बस भारतीय नागरिकता के रजिस्टर्ड में आपका नाम दर्ज करने की प्रक्रिया है ।

6 . नागरिकता कैसे दी जाती है? क्या यह प्रक्रिया सरकार के हाथ में होगी ?

नागरिकता नियम 2009 के तहत किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय की जाती है,यह नियम नागरिकता कानून 1955 के आधार पर बनाया गया है । इस नियम को सार्वजनिक रूप से सभी व्यक्ति धर्म के लिए सामान रखा गया है । किसी भी व्यक्ति के लिए भारत का नागरिक बनने के पांच तरीके हैं जो निम्नलिखित हैं ।

⏩ जन्म के आधार पर नागरिकता
⏩ वंश के आधार पर नागरिकता
⏩ पंजीकरण के आधार पर नागरिकता
⏩ देशियकरण के आधार पर नागरिकता
⏩ भूमि वितरण के आधार पर नागरिकता

7. जब भी NRC लागू होगा ,तो क्या हमें अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए अपने माता-पिता के जन्म का विवरण उपलब्ध कराना होगा ?

आपको अपना विवरण जैसे जन्म की तारीख माह वर्ष और स्थान के बारे में जानकारी देनी ही पर्याप्त है । अगर आपके पास अपने जन्म का विवरण उपलब्ध नहीं है तो आपको अपने माता-पिता के बारे में यही जानकारी उपलब्ध करानी होगी ।
लेकिन कोई भी दस्तावेज माता-पिता के द्वारा ही उपलब्ध कराई जाए ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं बनाई गई है ।
जन्म की तारीख और जन्म स्थान से संबंधित कोई भी दस्तावेज जमा कर अपनी नागरिकता साबित कराई जा सकती है । लेकिन अभी ऐसे कोई भी दस्तावेज के बारे में आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है ।
अपनी नागरिकता साबित करने के लिए भविष्य में आप निम्नलिखित में से किसी भी दस्तावेज का प्रयोग कर सकते हैं (केवल इसकी संभावना है )

वोटर आईडी कार्ड,पासपोर्ट ,आधार ,लाइसेंस बीमा के पेपर ,जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र ,जमीन या घर के कागजात या फिर सरकारी अधिकारियों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र ।
इस दस्तावेज की सूची और भी लंबी की जा सकती है ताकि कोई भी ऐसा नागरिक जो वाकई में भारतीय है ,उससे उसकी नागरिकता न छीनी जाए और इस नागरिक को किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े ।

8 अगर NRC लागू होता है तो क्या मुझे 1971 से पहले किए वंशावली को साबित करना होगा ?

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । 1971 से पहले की वंशावली के लिए आपको किसी प्रकार के पहचान पत्र माता-पिता या पूर्वजों के जन्म प्रमाण जैसे किसी भी दस्तावेज को प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है ।

यह केवल आसाम NRC के लिए मान्य था वह भी आसान समझौता और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के आधार पर ।

देश के बाकी हिस्से के लिए The Citizenship (registration of citizens and issue of national identity card ) Rules , 2003 के तहत NRC की प्रक्रिया पूरी तरह से अलग है ।

9. अगर पहचान साबित करना इतना ही आसान है तो फिर असम में 19 लाख लोग कैसे एनआरसी से बाहर हो गए ?

असम की समस्या को पूरे देश से जोड़ना यह ठीक नहीं रहेगा । वहां घुसपैठ की समस्या लंबे समय से चली आ रही है इसके विरोध में वहां 6 वर्षों तक आंदोलन भी किया गया है ।
इस घुसपैठ की वजह से राजीव गांधी सरकार को 1985 में एक समझौता करना पड़ा था जिसके तहत घुसपैठियों की पहचान करने के लिए 25 मार्च 1971 को कट ऑफ डेट माना गया है ,जो NRC को आसाम में लागू करने का आधार बना ।

10. क्या NRC के लिए मुश्किल और पुराने दस्तावेज माने जाएंगे ,जिन्हें जुटा पाना बहुत मुश्किल होगा ?

पहचान प्रमाणित करने के लिए बहुत सामान्य दस्तावेज की जरूरत होगी राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी की घोषणा होती है तो उसके लिए सरकार ऐसे नियम और दिशानिर्देश तय करेगी जिससे किसी को कोई परेशानी ना हो ।

सरकार की यह मंशा नहीं हो सकती है कि वह अपने नागरिकों को परेशान करें और किसी को दिक्कत में डालें ।

बाकी जब भी NRC को लागू किया जाएगा इसके दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे तभी आपको उचित और सही जानकारी उपलब्ध कराया जा सकेगा ।

अगर आपको NRC BILL और CAA से संबंधित और भी कोई जानकारी प्राप्त करनी है । तो नीचे दिए गए पीडीएफ को जरूर देखें जिसमें हमने आपको बहुत सारे सवाल और उसके जवाब दिए हैं ।

नोट :- उम्मीद है अब आपको CAA Citizenship Amendment Act और NRC National register of citizen से संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो गई होगी । आप इस पोस्ट को जितना हो सके उतना शेयर करें ताकि भारत के नागरिकों को सही जानकारी प्राप्त हो सके और वह सही जानकारी के अभाव में विरोध प्रदर्शन ना करें और ना ही हिंदू मुस्लिम के बीच कोई गलत भावना उत्पन्न करें ।

अंत में यही कहूंगा हिंदू ,मुस्लिम, सिख,ईसाई आपस में है भाई-भाई यह नारा हमारे देश का हमेशा से था और हमारे देश में हमेशा रहना चाहिए । उम्मीद है आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा इसे लाइक और शेयर जरूर करें ।

Posted By :- Amar Gupta

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